सोमवार, 30 नवम्बर 2009

कुंठा






अभी मिडिया में २६/११ आतंकी हमले की बरसी का प्रचार प्रसार चल रहा है । और विभिन्न प्रकार की स्कीम लगभग सभी न्यूज़ चेनलों पर २६/११ हमले की निंदा के लिए चल रही थी और लोगो को इस हमले की निंदा के करने के कुछ तरीके बताये जा रहे है कई जगोहो पर मृतको और शहीदों को श्रधांजलि दिए जाने के लिए लाखो रूपये खर्च करके सभाओं (समारोह) का आयोजन किया गया जिसमे कई बढ़ी-बढ़ी हस्तियों नेताओं और मिडिया कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही लेकिन मैं ये सब आपको इसलिए बता रहा हूँ की मुझे मालूम है की ये सब बाते आप सभी को भी मालूम होगी और इसमें कोई बुरी बात भी नहीं है पर अच्छी बात क्या है शायद ये हो की देश के सभी अभिनेता और अभिनेत्री नेताओ और भी कई नामचीन लोगो द्वारा मोमबती जलाने से आतंकवाद को मुहंतोड़ जवाब दिया गया (जैसा मिडिया में बताया गया ) और मानव श्रंखला बनाकर आतंकवाद को मुहंतोड़ जवाब दिया गया (जैसा मिडिया में बताया गया) या फिर दीवारों पर हस्ताक्षर कर के या फिर विभिन्न सन्देश लिख कर आतंकवाद को मुहंतोड़ जवाब दिया गया (जैसा मिडिया में बताया गया) ये सब प्रोग्राम मिडिया और कई बड़ी हस्तियों के कहने से हुआ होगे या फिर देश के नागरिको के द्वारा ही हुए हो पर मिडिया का कहना है की ये सब करके हमने हमारी शक्ति का प्रदर्शन किया और हजारो लाखो लोगो ने मोमबती जलाकर और इस प्रकार के अन्य तरीको का प्रयोग करके जो ऊपर लिखे है आतंकवाद को मुहतोड़ जवाब दिया है हो सकता है की ये सब बाते ठीक हो पर मेरे अर्थो में तो मुहतोड़ जवाब का मतलब कुछ अलग है भाई मुहतोड़ जवाब का मतलब होना चाहिए ईट का जवाब पत्थर से देना अपशब्द कहने वालो का मुह तोड़ देना ताकि फिर उस मुह से कभी भी अपशब्द न निकल सके राष्ट्र की खिलाफ उठने वाली आवाज को हमेसा के लिए बंद कर देना और हाथों को काट देना और भारतमाता के दामन पर चुभने वाले इन काटो के पेड़ को हमेशा के लिए उखाड़ फेकना और भारतमाता की और बुरी नजर डालने वालो की आखें निकाल लेना ये होता है मेरे हिसाब से तो मुहतोड़ जवाब देना और हिसाब बराबर करना इसमें से एक काम भी होता तो समझ में आता की आतंक को हमने मुह तोड़ जवाब दिया पर कुछ नहीं हुआ और हुआ तो सिर्फ इतना की साल भर में सेकड़ों श्रधांजलि सभाए की गई हजारो/लाखों मोमबत्तीया जलाई गई और हजारो हस्ताक्षर किये गए और इन सभी कार्यक्रमों को आतंक को मुहतोड़ जवाब देना बताया गया ।



पर इस बात में कोई सक नहीं है की यदि वास्तव में आतंक को मुहतोड़ जवाब दिया गया होता तो आज साल बार बाद देश की तस्वीर कुछ और ही होती । और सही मायनो में हमारे नेताओं के साथ साथ देश के नागरिक भी इस स्थिति के लिए जिमेदार है क्योंकि उन्हें मुहतोड़ जवाब देने का मतलब ही नहीं मालूम और जिसको मालूम है और जो मुहतोड़ जवाब देने में सक्षम है उनमे शायद इतनी इच्छाशक्ति ही नहीं है की कोई कठोर निर्णय ले सके और देश तथा दुनिया के सामने भारत की वीरवान छवि प्रस्तुत कर सके । सही मायनो में देश के दुश्मन और गद्दारों को सजा देकर सफाया कर देना ही वीर शहीदों और मारे गए मासूम नागरिकों को सच्ची श्रधांजलि होगी और उनकी आत्मा को शांति मिलेगी।




अंत में सिर्फ एक बात आतंक को मुहतोड़ जवाब आतंकियों और उनके आकाओं का मुह तोड़ के ही दिया जा सकता है।

1 टिप्पणियाँ:

Deepak Agarwal ने कहा…

Please Forward me a map photo of Akhanda Bharat(incl.Tibet,Afganistan & Yunnan) in big size which I can keep as my desktop background)
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